दोस्तों आज हम भारत के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में से एक वाराणसी जिले का इतिहास लेकर आए हैं

वाराणसी जिले का इतिहास
वाराणसी जिले का इतिहास

वाराणसी जिले को काशी के नाम से जाना जाता है पतित पावनी मां गंगा के तट पर स्थित वाराणसी भारत के  सबसे पवित्र शहरों में से माना जाता है प्राचीन ने मान्यताओं के अनुसार इसका नाम वाराणसी वरुणा काशी  और काफी नदियों के नाम को जोड़कर बना है यह शहर अपनी धार्मिक संस्कृतिक और वैभव की वजह से पूरे देश में प्रसिद्ध है लाखों की संख्या में देश-विदेश के पर्यटक यहां पर घूमने आते हैं। 

 यहां पर हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध धर्म और जैन धर्म  मैं भी इस  शहर को पवित्र माना जाता है  पौराणिक कथाओं के अनुसार 

काशी नगर की स्थापना

भगवान शिव ने लगभग 5000 वर्ष पूर्व की थी जिस वजह से वाराणसी आज महत्वपूर्ण तीर्थ अस्थल के रूप में जाना जाता है स्कंद पुराण रामायण महाभारत एवं प्राचीनतम वेद ऋग्वेद सहित कई ग्रंथों में इस नगर का उल्लेख किया गया है। वाराणसी को पराया मंदिरों का शहर भारत की धार्मिक राजधानी भगवान शिव की नगरी दीपों का शहर ज्ञान नगरी काशी विश्वनाथ आदि नामों से भी जाना जाता है वाराणसी की संस्कृति का गंगा नदी एवं इसके धार्मिक महत्त्व से अटूट रिश्ता है 

यह शहर सैकड़ों वर्षों से भारत देश का संस्कृतिक एवं धार्मिक केंद्र रहा है हिंदुस्तानी शास्त्री संगीत का बनारस घराना वाराणसी में ही जन्मा और विकसित हुआ भारत के अनेकानेक दार्शनिक लेखक कवि संगीतकार भी वाराणसी में ही रहे जिनमें कबीर दास रविदास वल्लभाचार्य स्वामी रामानंद उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद ट्रेलर स्वामी जयशंकर प्रसाद आचार्य रामचंद्र शुक्ल पंडित हरिप्रसाद चौरसिया एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खान आदि है

 वाराणसी के परम पावन पवित्र धर्म धरती 

गोस्वामी तुलसी दास जी ने हिंदू धर्म के सबसे परम श्री राम चरित्र मानस को लिखा था इसके अलावा महात्मा गौतम बुध अपना पहला प्रवचन वाराणसी के सारनाथ में ही दिया था धार्मिक नगरी वाराणसी के हजारों मंदिर प्राचीन काल से ही बनी हुई है जिनमें कुछ स्थल विश्व के अत्यंत ही प्रसिद्ध है जिनमें काशी विश्वनाथ संकट मोचन मंदिर दुर्गा मंदिर आसमान दे तुलसी मानस मंदिर आदि हैं विश्वनाथ के मूल मंदिर की परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है जिसके शिखर पर महाराजा रणजीत सिंह सोने के पत्थर चढ़ावा दिए थे 

संकटमोचन मंदिर की स्थापना 

गोस्वामी तुलसीदास ने की थी दुर्गा मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में मराठों ने करवाया था मां गंगा के तट पर अनेकों मंदिर बने हुए हैं इनमें सबसे प्राचीन गार्डवालों का बनवाया राजघाट आदि केशव मंदिर है विश्व प्रसिद्ध घाटों में मणिकर्णिका घाट हरिश्चंद्र घाट तुलसी घाट सिंधिया घाट मान मंदिर घाट ललिता घाट इत्यादि हैं

वाराणसी के घाटों का दृश्य बड़ा ही मनोरम है भागीरथी के धनुषआकार तट पर इन घाटों की पत्तियां दूर तक चली गई है प्रातकाल तो इनकी छटा इतनी अवधपुर अकल्पनीय होती है

और वाराणसी के प्रमुख पर्यटक स्थलों में सारनाथ गंगा घाट काशी विश्वनाथ मंदिर अन्नपूर्णा मंदिर काल भैरव मंदिर भारत माता मंदिर असी संगम घाट मणिकर्णिका घाट पंचगंगा घाट तुलसी घाट शिवालय घाट हनुमान घाट हरिश्चंद्र घाट राजघाट केदार घाट सोमेश्वर घाट मानसरोवर घाट राणा महल घाट मुंशी घाट मान मंदिर घाट त्रिपुर भैरवी घाट घाट घाट सिंधिया ग्वालियर घाट गंगा घाट  की आरती देखने के लिए सैलानियों का हुजूम उमड़ पड़ता है हर शाम गंगा आरती होती है
उत्तर प्रदेश के बारे में संपूर्ण जानकारी
उस समय नदी का नीचे की ओर बहता जल पूरी तरह से रोशनी में नहाया अभूतपूर्व होता है बनारस आने वाले प्रत्येक लोगों के मन में मां गंगा की आरती देखने का जुनून सवार रहता है धार्मिक शहर होने के साथ-साथ वाराणसी में शिक्षा का भी अनुपम संगम है शहर का बनारस हिंदू विश्वविद्यालय बीएचयू एशिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है  इसके अलावा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ पुणे से छात्र-छात्राएं आगे अध्ययन  करते हैं

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां